Ad

भारत यूरिया

'एक देश में एक फर्टिलाइजर’ लागू करने जा रही केंद्र सरकार

'एक देश में एक फर्टिलाइजर’ लागू करने जा रही केंद्र सरकार

भारत ब्रांड के तहत बिकेंगे देश में सभी उर्वरक

नई दिल्ली। देश भर में फर्टिलाइजर ब्रांड में यूनिफॉर्मिटी लाने के लिए सरकार एक देश में एक ही फर्टिलाइजर (One Nation One Fertilizer) के तहत काम करने जा रही है। भारत सरकार आज से एक आदेश जारी कर सभी कंपनियों को अपने उत्पादों को 'भारत' के सिंगल ब्रांड नाम के तहत बेचने का निर्देश दिया है। अब देश मे सभी फर्टिलाइजर ब्रांड एक ही नाम से बिकेंगे। देश भर में फर्टिलाइजर ब्रांड में यूनिफॉर्मिटी लाने के लिए सरकार ने आज एक आदेश जारी कर सभी कंपनियों को अपने उत्पादों को 'भारत' के सिंगल ब्रांड नाम के तहत बेचने का निर्देश दिया है।



ये भी पढ़ें:
अब किसानों को नहीं झेलनी पड़ेगी यूरिया की किल्लत

आदेश के बाद सभी उर्वरक बैग, चाहे यूरिया या डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) या म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP - Muriate of Potash) या एनपीके (NPK) हों, वह सभी ब्रांड नाम 'भारत यूरिया', 'भारत DAP', 'भारत MOP' और 'भारत NPK' के नाम से बाजार मे बिकेंगे। प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के मैन्युफैक्टर दोनों को भारत ब्रांड नाम देना होगा।


ये भी पढ़ें:
किसानों के लिए वरदान बनकर आया नैनो लिक्विड यूरिया
हालांकि, इसका फर्टिलाइजर कंपनियों ने नेगेटिव प्रतिक्रया दी है। कंपनियों के मुताबिक उनके ब्रांड वैल्यू और मार्केट में फर्क उन्हें खत्म कर देगा। सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि सिंगल ब्रांड नाम और प्रधानमंत्री भारतीय जनउरवर्क परियोजना (PMBJP) का लोगो भी लगाना होगा। ये वो स्कीम है जिसके जरिये केंद्र सरकार सालाना सब्सिडी देती है। कंपनी को ये लोगो (Logo) बैग पर दिखाना होगा। इंडस्ट्री के मुताबिक कुल पैकेजिंग के छोटे हिस्से पर ही कंपनी का नाम लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम उर्वरक कंपनियों को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि अलग ब्रांडिंग होने से फर्टिलाइजर में किसानों को फर्क साफ तरीके से दिखाई देगा। फर्टिलाइजर कंपनियां अपने आप को दूसरों से अलग करने के लिए कई तरह की एक्टिविटी करती है। इसके बाद यह सब शीघ्र ही बंद हो जाएगा। ---- लोकेन्द्र नरवार
किसानों को सस्ते दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए इतना लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने जा रही है केंद्र सरकार।

किसानों को सस्ते दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए इतना लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने जा रही है केंद्र सरकार।

सस्ते दर में किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने इस साल लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने का निर्णय लिया है। बीते दिनों प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के रामागुंडम में आधारशिला रखने और 9500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद कहा कि केंद्र सरकार इस साल 2.5 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी, जिससे किसानों को उर्वरक खरीदने में कम रुपए लगेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार पिछले 8 वर्षों में किसानों को उर्वरक का लाभ पहुंचाने के लिए लगभग 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए हैं जिसका मंसूबा यह है कि किसानों को उच्च वैश्विक उर्वरक के लागत में मोच का सामना नहीं करना पड़े।

ये भी पढ़ें:
अब नहीं होगी किसानों को उर्वरकों की कमी, फसलों के लिए प्रयाप्त मात्रा में मिलेगा यूरिया और डी ए पी

तेलंगाना के रामागुंडम में प्रधानमंत्री के द्वारा पंचानवे 100 करोड़ रुपए से अधिक की कई परियोजनाओं के लिए शिलान्यास किया गया। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए अभी बताया कि, पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में अभी तक लगभग 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक पैसे भेजे गए हैं, जिससे किसानों को कृषि के कार्य क्षेत्र में काफी फायदा हुआ है। यूरिया में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए पीएम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश में पांच महत्वपूर्ण उर्वरक सुविधा जो बरसों से निष्क्रिय थी। उसे पुनर्जीवित करने का केंद्र सरकार के द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है, कि अगर यह पांच संयंत्र पूरी तरह से चालू हो जाएंगे तो देश में लगभग 60 लाख टन यूरिया का उत्पादन हो पाएगा। जिसका परिणाम यह होगा कि किसानों को यूरिया अधिक आसानी से उपलब्ध हो पाएगा।

ये भी पढ़ें:
नैनो यूरिया का ड्रोन से गुजरात में परीक्षण 

अगर यह 5 संयत्र चालू हो जाएंगे तो देश के बाहर से आने वाले यूरिया जो कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से चलकर भारत में आते हैं, उसमे कमी होगी, जिससे जो महत्वपूर्ण लागत है उसमें भी कमी आएगी और किसानों को और कम दाम में यूरिया आसानी से उपलब्ध हो पाएगा। वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार “भारत यूरिया”नाम के तहत यूरिया का एकल ब्रांड को आगे बढ़ाने की पेशकश हुई है जिससे आने वाले समय में बेहतर लाभ पूरे भारतवर्ष को मिलेगा।

ये भी पढ़ें:
वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में भारी गिरावट, जानें क्या होगा भारत में इसका असर 

अगर ऐसा होता है तो विशेषज्ञों का कहना है, कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चीन से भी आगे निकल जाएगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रथम स्थान पर अपना बाजार बुलंद करते हुए नजर आएगा। मोदी ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में भाजपा के शासन के दौरान बहुत सारे बुनियादी बदलाव आए हैं। सरकारी प्रक्रिया में सुधार और व्यापार को करने में आसानी के साथ-साथ कृषि जगत को सुदृढ़ करने पर बहुत सारे कार्य लगातार किए जा रहे हैं, जिस पर हमारी पहली नजर है। 

₹2000 की यूरिया की बोरी अब मिलेंगे मात्र इतने रुपए में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूरिया की बोरी की कीमत लगभग ₹2000 हैं। लेकिन हमने पिछले 8 सालों के शासन के दौरान जिस तरह से कार्य किए हैं, और कृषि के महत्व पर जिस तरह से हमने जोड़ दिया है, उससे ₹2000 की यूरिया की बोरी को मात्र अभी ₹270 में उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले समय में अगर इस तरह से ही कार्य होते रहे तो यह दाम घटकर और नीचे आएगा और किसान आसानी से यूरिया प्राप्त कर पाएंगे।

ये भी पढ़ें:
इफको ने देश भर के किसानों के लिए एनपी उर्वरक की कीमत में कमी की

उर्वरक उपलब्धता के सुधार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूरिया की 100% नीम कोटिंग पर लगातार कार्य किया जा रहा है। बंद पड़े 5 बड़े शहरों के खुलने से प्रतिवर्ष लगभग 700000 टन से ज्यादा यूरिया का उत्पादन होगा, पूरे भारतवर्ष में एक ब्रांड यानी भारत ब्रांड के नाम से उर्वरक उपलब्ध हो पाएगा। उर्वरक को सस्ता रखने के लिए 8 सालों में लगभग 10 लाख करोड़ खर्च किए गए हैं, और इस साल अभी तक 2.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके है। सरकार के लाख प्रयासों के बाद बाद भी पिछले कुछ महीनों में देखा गया कि यूरिया खाद की कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रहा था, जिससे किसानों को समय पर यूरिया खाद मिलने में परेशानी हो रही थी। यूरिया का कारोबार कालाबाजारी करके किसान द्वारा एक बोरी पर 500 से ₹550 प्रति बोरा की दर से कालाबाजारी की जा रही थी, जिससे किसान काफी परेशान नजर आ रहे थे और चौक चौराहे को जाम कर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार के द्वारा उर्वरक को बढ़ावा देने और कालाबाजारी को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कठिन से कठिन निर्णय भी लिए जा रहे हैं। जिससे आने वाले समय में किसानों को कम से कम दर में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और सही समय पर किसानों को यूरिया मिल पाएगा जिससे किसान बेहतर रूप से खेती करने में सक्षम होंगे।